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Creative Section | सृजनात्मक अनुभाग

Poetry, Fiction and Literary Expression in Hindi and English

Creative Author · रचनाकार

सुनीता मेहता

रामचन्द्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उत्तरकाशी

Published Creative Works · प्रकाशित रचनाएँ

Works by सुनीता मेहता

Non-Fiction

नकली विश्वविद्यालय में सच्ची उलझन

Volume 1 · Issue 1 September 2025 pp. 108–110
डीन साहब का चश्मा उनकी नाक के आखिरी छोर से लटक रहा था, जैसे खुद को नीचे गिरने से रोकने की कोई कोशिश कर रहा हो। कमरा, जिसे "रणनीतिक योजना कक्ष" कहा जाता था, उसमें हवा का एक अंश भी नहीं था। शायद हवा को भी अंदर आने के लिए तीन चरणीय अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ता होगा। "अगले शैक्षणिक सत्र के लिए हमारा फोकस एरिया," डीन साहब ने गंभीरता से कहा, "है 'सीखने के अनुभवों को बहु-आयामी, बहु-विषयक और बहु-संवेदी बनाना'।" मेज के चारों ओर बैठे सभी विभागाध्यक्षों ने एक साथ सिर हिलाया, जैसे उनकी गर्दनें किसी अदृश्य हैडफोन से जुड़ी हों जिस पर एक ही गाना बज रहा हो। केवल दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर वर्मा, जो अपनी चाय की चुस्कियों के बीच अस्तित्व के संकट से जूझ रहे थे, ने आवाज उठाई। "महोदय, एक व्यावहारिक प्रश्न है। क्या इस 'बहु-संवेदी अनुभव' में कक्षाओं में कार्यशाला की मरम्मत शामिल है? मेरे विभाग की छत से पानी टपकता है, और वह 'श्रवण' और 'स्पर्श' दोनों अनुभव प्रदान कर रहा है।" डीन साहब ने चश्मे को ऊपर धकेला, जैसे विचार को धकेल रहे हों। "प्रोफेसर वर्मा, आप तुच्छ व्यावहारिकताओं में उलझ रहे हैं। हम एक बृहत् दृष्टिकोण बना रहे हैं। हमने एक कमेटी बनाई है जो 'शैक्षणिक वातावरण में जलवायु नियंत्रण के दार्शनिक पहलुओं' पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में केवल दो सत्र लगेंगे।" व्यवसाय प्रशासन विभाग की प्रमुख, डॉ. शुक्ला, जिनकी पोशाक का रंग उनके पावरपॉइंट स्लाइड्स से मेल खाता था, ने हस्तक्षेप किया। "हमें अपने छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है। इसलिए मेरा प्रस्ताव है कि हम 'डिजिटल एनालॉग सिनर्जी के युग में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का पुनर्मूल्यांकन' नामक एक नया कोर्स शुरू करें। पाठ्यक्रम तैयार है, बस विषयवस्तु की जरूरत है।" "शानदार!" डीन साहब ने उत्साह से कहा। "क्या इसे पढ़ाने के लिए कोई तैयार है?" "कोई नहीं," डॉ. शुक्ला ने मुस्कुराते हुए कहा। "इसलिए हम एक गेस्ट लेक्चरर का बजट मांगेंगे, जो शायद कभी आएगा ही नहीं, और फिर बजट का उपयोग... अन्य रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए करेंगे।" हिंदी विभाग के प्रमुख, जिनका मानना था कि संस्कृत के सभी शब्दों का हिंदीकरण होना चाहिए, ने खांसी साफ की। "महोदय, एक और गंभीर मुद्दा है। कैंटीन के मेनू बोर्ड पर 'समोसे' की स्पेलिंग गलत है। यह हमारी शैक्षणिक गरिमा को कलंकित कर रहा है। मैं इसकी जांच के लिए एक त्रिसदस्यीय समिति का गठन चाहता हूं।" डीन साहब ने सहमति में सिर हिलाया। "बिल्कुल। हमारी प्रतिष्ठा दांव पर है। प्रोफेसर वर्मा, आप भी इस समिति में रहेंगे।" "मेरा विभाग पानी में डूब रहा है," प्रोफेसर वर्मा ने निराश होकर कहा। "तो फिर यह आपके लिए एक प्रासंगिक नियुक्ति है," डीन साहब ने निर्णायक तरीके से कहा। "आप 'नमी और शैक्षणिक नीति' के विशेषज्ञ हो जाएंगे। अब, अगले मुद्दे पर: हमारी वेबसाइट के 'अबाउट अस' पेज को अपडेट करने के लिए हमें 'कंटेंट राइटर' की आवश्यकता है। आवेदक के पास अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी और कम से कम पांच साल की डिजिटल मार्केटिंग की अनुभव होनी चाहिए। वेतन: प्रतीकात्मक।" बैठक एक और घंटे चली, जिसमें "ग्रेडिंग व्यवस्था में नीले रंग के उपयोग", "सेमिनार में बिस्कुटों की गुणवत्ता नियंत्रण नीति" और "पार्किंग स्थल पर कौवों की समस्या पर अंतःविषय दृष्टिकोण" जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। जब बैठक समाप्त हुई, तो प्रोफेसर वर्मा बाहर निकले और उन्होंने देखा कि उनकी कक्षा की छत से अब एक स्थिर धारा बह रही थी। छात्र पानी के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े थे, फोन से वीडियो बना रहे थे। एक छात्र ने उत्साह से कहा, "सर, यह वह 'बहु-संवेदी अनुभव' है जिसके बारे में उन्होंने बैठक में बात की थी न?" वर्मा साहब ने चुपचाप अपना बैग उठाया। उन्होंने डीन साहब का आदेश याद किया: समिति की रिपोर्ट जल्दी जमा करनी थी। वह समझ नहीं पा रहे थे कि रिपोर्ट किस पर लिखनी है – समोसे की स्पेलिंग पर, या अपने डूबते हुए विभाग पर, या उस हवा पर जो कमरे में कभी आती ही नहीं थी। वह चाय की दुकान की ओर चल पड़े। वहां कम से कम चाय गर्म तो होती थी, भले ही उसका स्वाद संदेहजनक ही क्यों न हो।