Creative Author · रचनाकार
दीपक नेगी
विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखंड
Published Creative Works · प्रकाशित रचनाएँ
Works by दीपक नेगी
Poetry
अडिग ध्रुव
Volume 1 · Issue 1
September 2025 pp. 83
तुम्हारे शून्य से बड़ा हूँ मैं
और शून्य में ही खड़ा हूँ मैं
ध्यान में जिसको साधते हो तुम
स्वप्न में जिसके जागते हो तुम
उस मनश्व: से लड़ा हूँ मैं
चेतना बिंदु से बड़ा हूँ मैं
तुम्हारी ज्ञान दृष्टि के छोर में
अनुकल्पित एक कल्प भोर में
अस्तित्व के प्रश्नों के शोर में
उत्तर ले ध्रुव अडिग खड़ा हूँ मैं
तुम्हारी प्रेक्षा में ही प्लवित
चेतना बिंदु से बड़ा हूँ मैं
मूक अंतर्नाद की अनुगूँज हूँ मैं
गुंजित भ्रमरगीत का हेमंत हूँ मैं
सुर नर असुर सब ही तो हूँ मैं
कालकूट पीयूष मंथन में पड़ा हूँ मैं
तुम्हारे शून्य से बड़ा हूँ मैं
और शून्य में ही खड़ा हूँ मैं