Poetry
तिलचट्टे और केक
Writer & Affiliation · लेखक परिचय
Published Work · प्रकाशित रचना
मेरे मस्तिष्क की दीवारें
संकीर्ण होती जा रही
रोशनी की पतली सी किरण
जब धमकती बिना आमंत्रण
उसके भीतर सैकड़ों तिलचट्टे
कुलबुलाते हुए एक तरफ हो जाते
जिसके भार से
मस्तिष्क की फर्श डगमगाती
कुछ तिलचट्टे फिसल कर बाहर
रसोई में गिर पड़ते
फ्रिज के नीचे घुसते कुछ तिलचट्टे को
मैं बेझिझक कुचल देता
और उनकी लाशों के बगल में
मेरे जन्मदिन का कई दिनों से ठंडा पड़ा केक
टुक-टुक ताकता मुझे